राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का रायपुर आगमन | बस्तर दशहरा 2026

By ·

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का रायपुर आगमन, बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में सहभागिता प्रदेश के लिए गौरव: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर, 22 अक्टूबर 2026। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के छत्तीसगढ़ आगमन पर स्वामी विवेकानंद विमानतल, रायपुर में राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रभु श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या की पावन धरा छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत किया।



बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की सहभागिता

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि ऐतिहासिक बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की सहभागिता पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है। उनकी उपस्थिति से प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और गौरवशाली परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति की सहभागिता से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय परंपराओं का मान बढ़ेगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति को मिलेगा प्रोत्साहन

बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है। वहीं, मुरिया दरबार बस्तर की जनजातीय परंपराओं और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आयोजन है।

राष्ट्रपति की सहभागिता इन परंपराओं के महत्व को रेखांकित करती है और देशभर में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।

विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई ऊर्जा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति के आगमन को प्रदेश के लिए सम्मान और गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय गौरव और परंपराओं का संरक्षण राज्य की पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राष्ट्रपति की इस यात्रा से प्रदेश की सांस्कृतिक उपलब्धियों और परंपराओं को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है।

निष्कर्ष: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का छत्तीसगढ़ आगमन और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार में उनकी सहभागिता प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय गौरव और परंपराओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति, जनजातीय गौरव और परंपराएँ ही प्रदेश की असली पहचान हैं।